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Blood pressure 

रक्तचाप (Blood pressure) रक्त वहिनियों में बहते रक्त द्वारा वाहिनियों की दीवारों पर डाले गये दबाव को कहते हैं। धमनियां वह नलिका हैं जो धमनियां (Arteries) पंप करने वाले ह्रदय से blood को शरीर के सभी ऊतको (Tissue)  और इंद्रियों तक ले जाते हैं। ह्रदय रक्त को धमनियों में पंप करके धमनियों में रक्त प्रवाह को विनियमित करती है और इस पर लगने वाले दबाव को ही रक्त चाप कहते हैं।अर्थात् रक्तवाहिनियों में बहते रक्त वाहिनियों की दीवारों पर डाले गए दबाव को रक्तचाप (Blood pressure) कहते है।
किसी व्यक्ति का रक्तचाप सिस्टोलीक डायास्टोलिक रक्तचाप के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है जैसे 120/80

सिस्टोलीक रक्तचाप (Systolic blood pressure) ऊपर की संख्या धमनियों के दाब को दर्शाती है इसमें ह्रदय की मांसपेशियाँ संकुचित होकर धमनियों में रक्त को पम्प करती हैं।


डायास्टोलिक रक्तचाप  (Diastolic blood pressure) नीचे वाली संख्या धमनियों में उस दाब को दर्शाती है जब संकुचन के बाद ह्रदय की मांसपेशियाँ शिथिल हो जाती हैं।

एक सामान्य व्यक्ति का सिस्टोलीक रक्तचाप पारा के 90 - 120 मिलीमीटर के बीच तथा डायास्टोलिक रक्तचाप पारा के 60 - 80 मिलीमीटर के बीच होता है।

रक्तचाप यंत्र (Blood pressure device) रक्तचाप को मापने वाले यंत्र को रक्तचापमापी (स्फाइग्नोमैनोमीटर) कहते हैं।


Blood pressure



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महत्वपूर्ण तथ्य


  1.  1773 में स्टीफन हेल्स ने पहली बार रक्तचाप घोड़ों में मापा गया 
  2. 1983 में कापलन ने रक्तचाप को परिभाषित किया।

Blood pressure chart




निम्न रक्तचाप (Hypotension)

 वह pressure जिसमें धमनियों और नसों मे रक्त का प्रवाह (Flow) कम होने के लक्षण या संकेत दिखाई देते हैं। जब रक्त का प्रवाह काफी low होता है तो Brain, heart and kidney जैसी महत्वपूर्ण इन्द्रियों मे ऑक्सीजन व पौष्टिक आहार नहीं पहुँच पाते है जिससे यह अंग सामान्य रूप से काम नहीं कर पाती है और स्थाई रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

लक्षण 

यदि किसी को रक्तचाप के कारण चक्कर आता हो या मिलती आती हो या खड़े होने पर बेहोश होकर गिर पड़ता हो तो उसे  Orthostatic उच्च रक्तचाप कहते है। खड़े होने पर निम्न रक्त दाब के कारण होने वाले effect को सामान्य व्यक्ति शीघ्र ही काबू में कर लेता हैं यदि जब पर्याप्त रक्तचाप के कारण चक्रीय धमनी मे रक्त की आपूर्ति नहीं होती है तो व्यक्ति को सीने में दर्द (Pain) होने लगता है या फिर दिल का दौरा पड़ सकता हैं जब गुर्दों में पर्याप्त मात्रा मे खून की Supply नहीं होती है तो गुर्दें शरीर से यूरिया और अपशिष्टों (effluents) को निकाल नहीं पाते जिससे रक्त में इनकी मात्रा बढ़ जाती हैं।

चक्रीय धमनी 

कोरोनरी धमनी (Coronary artery) जो ह्रदय के मांस पेशियों को रक्त की आपूर्ति करती हैं।

आघात 

यह एक ऐसी स्थिति है जिससे जीवन को खतरा हो जाता है निम्न रक्तचाप की स्थिति में ह्रदय, गुर्दें, फेफड़े तथा मस्तिष्क तेजी से खराब होने लगता हैं।

उच्च रक्तचाप (pre hypertension) 

130/70 उच्च रक्तचाप होता हैं धमनियों में अधिक दाब के कारण है।इसका अर्थ यह नहीं है कि अत्यधिक भावनात्मक तनाव हो भावनात्मक तनाव व दबाव अस्थायी तौर पर रक्त के दाब को बढ़ा देते हैं। सामान्यतः रक्तचाप 120/70 से कम होनी चाहिए और 120/70 तथा 139/79 के बीच का रक्त दबाव पूर्व उच्च रक्तचाप (pre hypertension) कहलाता हैं।

लक्षण 

 उच्च रक्तचाप के कारण चिंता, क्रोध, ईर्ष्या, भ्रम, कई बार आवश्यक से अधिक भोजन खाने से, मैदे से बने खाद्य पदार्थ, चीनी, मसाले, तेल, घी, अचार, मिठाइयाँ,मांस, चाय, सिगरेट  व शराब के सेवन से, श्रमहीन जीवन व Exercise के अभाव से हो सकता है
उच्च रक्तचाप का समय पर निदान महत्वपूर्ण हैं
सावधानियाँ उच्च रक्तचाप के मरीजों को पोटेशियम (p) युक्त भोजन करना चाहिए जैसे ताजे फल, डिब्बे में बंद सामग्री का प्रयोग बंद कर दे, भोजन में कैल्शियम (Ca) की मात्रा संतुलित करनी चाहिए
Pre hypertension के समय रेशे युक्त पदार्थ खूब खाने चाहिए,
 संतृप्त वसा (मांस, वनस्पति घी) की मात्रा कम-से-कम करनी चाहिए, इसके साथ ही नियमित Exercise करनी चाहिए,सुबह - सुबह तेज लगातार 30 minute पैदल चलना चाहिए, धूम्रपान व मदिरापान का सेवन नहीं करना चाहिए।


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