Introduction to blood

रक्त का परिचय (Introduction to blood)

रक्त एक विशेष प्रकार का ऊतक है जो गाढ़ा,चिपचिपा व लाल रंग का होता है तथा रक्त वाहिनियों में प्रवाहित होता रहता है। रक्त प्रणाली के अनुसार यह प्रतिजन Protein, carbohydrates glycoprotein or glycolipid हो सकते हैं। इनमें कुछ प्रतिजन ऊतको और कोशिकाओं की सतह पर भी उपस्थित हो सकते है यह प्लाज्मा (निर्जीव तरल माध्यम ) तथा रक्त कणिकाओं  से मिलकर बना होती है।
 प्लाज्मा विभिन्न अंगों से हानिकारक पदार्थों को उत्सर्जी अंगों तक लाने का कार्य करता है तथा प्लाज्मा आंतो से अशोषित पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाने कार्य करती हैं।

 रक्त  व रक्त समूह (Blood and blood groups)

 प्लाज्मा के अन्दर तीन प्रकार(Type of three)की रक्त कणिकाएं मिलती हैं।

1.  लाल रक्त कणिकाएँ (Red blood corpuscles)

गैसों का परिवहन तथा विनिमय करती है 

2.  श्वेत रक्त कणिकाएँ (White blood corpuscles)

शरीर की रोगाणु आदि से रक्षा करती हैं।

3. बिंबाणु (Platelets)

 रक्त स्त्राव में मदद करती है।

रक्त समूह (Blood groups)



सर्वप्रथम वैज्ञानिक कार्ल लैडस्टीनर ने (1901) में रक्त का विभिन्न समूहों में वर्गीकरण किया। रक्त की लाल रक्त कणिकाओं की सतह पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रतिजनो की उपस्थिति तथा अनुपस्थिति के आधार पर वर्गीकरण कर विभिन्न समूहों में बांटा गया है। सामान्यतः ये प्रतिजन प्रोटीन, गलाइकोप्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट या ग्लाइकोलिपिड हो सकते है। ये प्रतिजन एक ही विक्लपी (allele) या संबंधित जीन द्वारा उत्पन्न होते है ये प्रतिजन वंशानुगत रूप से माता व पिता दोनों से कोई से भी प्राप्त होते है।
लाल रक्त कणिकाओं की सतह पर मुख्य रूप से दो प्रकार के प्रतिजन - (प्रतिजन A व प्रतिजन B) पाए जाते है। इन प्रतिजनो की उपस्थिति के आधार पर कुछ 4 प्रकार के रक्त समूह पाए जाते है-A,B,AB व O
ABO को समूहीकरण कहा जाता है
A प्रकार के रक्त में लाल रक्त कणिकाओं पर A प्रकार का प्रतिजन पाया जाता है
B प्रकार के रक्त में लाल रक्त कणिकाओं पर B प्रकार का प्रतिजन पाया जाता है
AB प्रकार के रक्त में लाल रक्त कणिकाओं पर A व B दोनों प्रकार के प्रतिजन पाए जाते है। O प्रकार के रक्त में लाल कणिकाएँ A तथा B प्रतिजन दोनों से विहीन होती है
A व B के अतिरिक्त लाल रक्त कणिकाओं पर आर एच (Rh) नामक एक और प्रतिजन पाया जाता है। यदि रक्त कणिकाओं की सतह पर आर एच प्रतिजन (Th antigen) उपस्थित हो तो रक्त आर एच धनात्मक (Rh positive या Rh+) कहलाता है वह रक्त जिस में रक्त कणिकाएँ आर एच प्रतिजन से विहीन होती है आर एच ऋणात्मक (Rh negative या Rh-)रक्त कहलाता है यह व्यवस्था आर एच (Rh)समूहीकरण कहलाती है।
Introduction to blood Introduction to blood Reviewed by shirswastudy on February 28, 2019 Rating: 5

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