पदार्थ द्रव्य की अवस्था परिवर्तन व प्रभाव (Effects of Temperature and Pressure on Matter

जब भी द्रव्य अवस्था में परिवर्तन होता हैं। तो मुख्यतः उनके कणों के मध्य की दूरी, कणों की ऊर्जा एवं कणों की स्थिति में परिवर्तन होता हैं।

  1. तापमान का प्रभाव (Effect of Temperature)
  2. दाब का प्रभाव (Effect of Pressure)

तापमान का प्रभाव (Effect of Temperature) ताप देने से कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है।ठोस को ताप देने पर कण अधिक तेजी से कंपन करने लगते हैं। ऊष्मा के द्वारा प्रदत्त की गई ऊर्जा कणों के बीच के आकर्षण बल को पार कर लेती है। इस कारण कण अपने नियत स्थान को छोड़कर अधिक स्वतंत्र होकर गति करने लगते हैं। एक अवस्था ऐसी आती हैं, जब ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है

वह ताप जिस पर ठोस पिघलकर द्रव बन जाता हैं। उसे पदार्थ का गलनांक (Melting point) कहते हैं। बर्फ का गलनांक 273.16 K हैं।

गलने की प्रक्रिया यानि ठोस से द्रव अवस्था में परिवर्तिन को संगलन (Fusion) कहते हैं। 
"1 वायुमंडलीय दाब पर 1 किलोग्राम ठोस को उसके गलनांक पर द्रव में बदलने के लिए जितनी ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं उसे संगलन की प्रसुत ऊष्मा या गुप्त ऊष्मा (एंथैलपी) कहते हैं " ।
द्रव को ताप देने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ने से गैस में बदलते हैं। वह ताप जिस पर द्रव, गैस में बदलता है उसे क्वाथनांक (Boiling point) कहते है।

1 वायुमंडलीय दाब पर 1 किलोग्राम द्रव को उसके क्वथनांक पर वाष्प में बदलने के लिए जितनी ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं उसे वाष्पन की प्रसुप्त ऊष्मा या गुप्त ऊष्मा (एंथैल्पी) कहते हैं 

दाब का प्रभाव (Effect of Pressure) दाब लगाने पर गैस के कण समीप आते हैं। इनके मध्य दूरी घटन पर गैस अवस्था द्रव में बदल जाती हैं परंतु अत्यधिक दाब लगाकर द्रव को ठोस नहीं बना सकते हैं क्योंकि द्रव में संपीड़यता अत्यंत कम होती हैं।

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