समुच्चय बोधक : परिभाषा,भेद एवं उदाहरण

वे अव्यय शब्द जो दो शब्दों या दो वाक्यों को जोड़ने या अलग करने का कार्य करते हैं। उन्हें समुच्चय बोधक अव्यय कहते हैं।
जैसे किन्तु, तथा यदि, और, मगर, चाहें, लेकिन, हालांकि आदि।
उदाहरण
  • राजेश ने कठिन मेहनत की ओर सफल हुआ
  • निशा बहुत तेज दौड़ी लेकिन प्रथम नहीं आ सकी
  • विकास और मोहन बहुत अच्छे मित्र हैं।
समुच्चय बोधक अव्यय : परिभाषा,भेद और उदाहरण। Hindi Grammar। Shirswastudy

समुच्चय बोधक अव्यय के भेद

समुच्चय बोधक अव्यय के दो प्रकार के होते हैं।

  1. समानाधिकरण समुच्चय बोधक
  2. व्यधिकरण समुच्चय बोधक अव्यय

  1. समानाधिकरण समुच्चय बोधक अव्यय

जो समुच्चय बोधक समान स्थिति वाले अर्थातु स्वतंत्र शब्दों, वाक्यांशों। या वाक्यों को जोड़ने का कार्य करते हैं।, उन्हें समानाधिकरण समुच्चय बोधक अव्यय कहते हैं।
पहचान :- और, तथा, व, चाहे, किंतु, परन्तु, लेकिन, मगर, या, इसलिए आदि
उदाहरण
  • रानी और सोनल खेल रही है।
  • चाहे पायल गाए चाहे पारूल है।
समानाधिकरण समुच्चय बोधक चार प्रकार होते हैं।

  1. संयोजक
  2. विकल्प सूचक या विभाजक
  3. विरोध सूचक
  4. परिणाम सूचक

1.  संयोजक दो पदों, वाक्यांशो या वाक्यों को जोड़ने वाले अव्यय अर्थात् दो स्थितियों को जोड़ने का कार्य करने वाले अवयव को संयोजक समानाधिकरण समुच्चय मोदक अवयव कहते हैं।
हैं
पहचान :- और, तथा, व, एवं आदि
उदाहरण
  • राम, लक्ष्मण और सीता वन को गए।
  • मीरा ने गीत गाया और राधा ने नृत्य किया।
2. विकल्प सूचक या विभाजक दो पदों वाक्यांशों अथवा वाक्यों के भेद प्रकट करते हुए जिनमें एक के ग्रहण और दूसरे के त्याग का बोध हो
पहचान :- या, अथवा, चाहे, आदि
उदाहरण
  • विज्ञान अथवा कला में से एक चुन लो।
  • चाहे यह करो चाहे वह
  • आप मेरे साथ रहेंगे या बलराम के साथ।
  • ठीक से पढ़ाओं अथवा नौकरी छोड़ दो।
  • तू पढ ले या बात कर ले
  • आप पहुंच जायेंगे या में आपको फोन करूं।
3. विरोध सूचक दो विरोधी उपवाक्य को जोड़ने वाले समुच्चय बोधक अव्यय अर्थात् जब दो उप वाक्यों में के बीच विरोधाभास का बोध हो उसे विरोध सूचक अव्यय कहते हैं
पहचान :- पर, परन्तु, मगर, किंतु, लेकिन, बल्कि, वरन्, प्रत्युत, अपितु आदि
उदाहरण
  • सूरदास अंधे थे परन्तु संवेदनहीन नहीं
  • अपराधी को मात्र सज़ा ही नहीं वरन् मृत्युदंड मिलना चाहिए था।
  • केशव पढ़ने में तो अच्छा है लेकिन बात बहुत करता है
4. परिमाण सूचक  समुच्चय बोधक के बाद  का वाक्यांश या वाक्य पहले अंश परिणाम हो अर्थात जब पहले उपवाक्य से कार्य का तथा दूसरे उपवाक्य से उसके परिणाम का बोध होम उसे परिणाम सूत्र कहते हैं।
पहचान :- अतः, अतएव, इस कारण, इस वास्ते, नहीं तो, अन्यथा आदि
उदाहरण
  • उसने चोरी की थी इसलिए उसे सजा मिली।
  • राहुल बहुत बीमार था अतः चुप ही बैठा रहा
  • आज बाजार बंद है इसलिए कुछ नहीं मिलेगा।

2. व्यधिकरण समुच्चय बोधक

जिन वाक्यों में एक मुख्य उपवाक्य हो तथा दूसरा उपवाक्य उस पर आश्रित हो तो ऐसे उपवाक्य को जोड़ने वाले अव्यय व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहलाते हैं।
पहचान :- कि, क्योंकि, यदि, यद्यपि, मानों, तथापि, अर्थात्, यानि, चूंकि, यहां तक कि आदि।
  • जल्दी तैयार हो जाओ ताकि गाड़ी पकड़ सके।
व्यधिकरण समुच्चय बोधक के प्रकार
व्यधिकरण समुच्चय बोधक के चार प्रकार होते हैं।

  1. कारण बोधक
  2. संकेत बोधक
  3. उद्देश्य बोधक
  4. स्वरूपबोधक अव्यय

1. कारण बोधक मुख्य उपवाक्य की बात का कारण बताने वाले अवयव कारण बोधक व्ययधिकरण समुच्चयबोधक कहलाते हैं
पहचान :- कि, चूंकि, क्योंकि
उदाहरण
  • वह इसलिए विद्यालय नहीं आया क्योंकि बीमार था।
2. संकेत बोधक मुख्य उपवाक्य से आश्रित उपवाक्य में कही गई बात की ओर संकेत करने वाले अथवा शर्त प्रकट करने वाले एवं संकेत बोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं।
पहचान :- यदि, तो, यद्यपि, तथापि
उदाहरण
  • यदि तुम परिश्रम करोगे तो अवश्य सफल हो जाओगे
  • यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती
3. उद्देश्य बोधक अव्यय मुख्य उपवाक्य का उद्देश्य आश्रित उपवाक्य में प्रकट करने वाले अवयव उद्देश्य बोधक व्यधिकरण समुच्चय बोधक अव्यय कहते हैं
पहचान :- ताकि, जिससे कि, कि, जो
उदाहरण
  • यह इसलिए नित्य सैर को जाता है ताकि स्वस्थ रहें
  • वह लड़का जो प्रथम आया है मेरा भाई है।
4. स्वरूप बोधक अव्यय जो अवयव मुख्य उपवाक्य में कहीं गई कहीं गई बात का आश्रित उपवाक्य में स्पष्टीकरण करते हैं उन्हें स्वरूप बोधकअव्यय कहते हैं।
पहचान :- मानो, यानि, अर्थात्
उदाहरण
  • इतनी तेज आंधी चली मानव तूफान आ गया।
  • पेटु राहुल इतना खाता है मानो भीम है

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