अव्ययीभाव समास की परिभाषा, उदाहरण और नियम

जिस समस्त पद में कोई एक पद अव्यय या उपसर्ग हो तथा कोई दूसरा पद संज्ञा, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।



अव्ययीभाव समास: परिभाषा, उदाहरण, अर्थ | AVYAYIBHAV SAMAS

पहचान

  1. जैसे कि विदित है अव्ययीभाव समास में अव्यय का भाव पाया जाता है।
  2. अव्ययीभाव समास में पहला पद प्रधान होता है यदि पहले पद को हटा दिया जाए तो दूसरा पद निश्चित सटीक अर्थ प्रदान नहीं करता है जैसे यथाशक्ति नोट  इस समस्त पद में यदि पहले पद को हटा दिया जाए तो दूसरा पद अपने अर्थ की सीमा निर्धारित नहीं कर पाता है दूसरे पद शक्ति का अर्थ ताकत हुआ लेकिन यह नहीं पता कि शक्ति कितनी है या किसके अनुसार है
  3. अव्ययीभाव समास में किसी संज्ञा शब्द में अव्यय उपसर्ग जुड़ता है जिससे पूरा समस्त पद अव्यय बन जाता है
  4. पुनरावृति शब्द भी अव्ययीभाव समास के अन्तर्गत आते हैं।
  5. उपसर्ग युक्त पद भी अव्ययीभाव समास के अन्तर्गत आते हैं।

अव्यय की परिभाषा


अव्यय 'अव्यय' किसी भी लिंग वचन विभक्ति या पुरुष में प्रयोग करने पर उसके रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता है अर्थ अर्थ सदैव एक जैसा रूप रखने वाला शब्द अवयव शब्द कहलाता है।


अव्ययीभाव समास के भेद

अव्ययीभाव समास दो प्रकार का होता है।

1. नामपद पूर्व अव्ययीभाव समास
2. अव्यय पद पूर्व अव्ययीभाव समास


(1 ) नामपद पूर्व अव्ययीभाव समास
जिस समस्त पद में पहला पद संज्ञा हो और दूसरा पद अवयव हो उसे नामपद पूर्व अव्ययीभाव समास
कहते हैं।
नामपद पूर्व अव्ययीभाव समास उदाहरण

निर्देशानुसार – निर्देश के अनुसार
कथनानुसार – कथन के अनुसार
नियमानुसार – नियम के अनुसार
इच्छानुसार – इच्छा के अनुसार
दानार्थ – दान के लिए
नित्य प्रति – जो नित्य हो
जीवनभर – पूरे जीवन
विवाहोपरान्त – विवाह के उपरान्त
मरणोपरांत – मृत्यु के उपरान्त
दर्शनार्थ – दर्शन के लिए
ज्ञानार्थ – ज्ञान के लिए
सेवार्थ – सेवा के लिए
हितार्थ – हित के लिए
प्रश्नानुसार – प्रश्न के लिए अनुसार
क्रमानुसार – क्रम के अनुसार
विश्वासपूर्वक – विश्वास के साथ

(2) अव्ययपद पूर्व अव्ययीभाव समास

जिस समस्त पद में पहला पद अव्यय या उपसर्ग हो तथा दूसरा पद संज्ञा हो उसे अव्यय पद पूर्व अव्ययीभाव समास कहते हैं।

अव्ययपद पूर्व अव्ययीभाव समास उदाहरण

यथार्थ – जैसी योग्यता है वैसी
दरहकीकत – हक़ीक़त में
अनुगमन – गमन के पीछे गमन
प्रत्यारोप – आरोप के बदले आरोप
आसमुद्र – समुद्र पर्यन्त
यावज्जीवन – जीवन पर्यन्त
यथानियम – नियम के अनुसार
हरेक – एक एक
समक्ष – आंखों के सामने
यथार्थ – अर्थ के अनुसार
बखूबी – खूबी के साथ
यथाशक्ति – शक्ति के अनुसार
प्रत्यक्ष – आंखों के सामने
अनुसार – जैसा सार है वैसा
प्रतिलिपि – लिपि के समकक्ष लिपि

अव्ययीभाव समास के अन्य नियम

(1)  जब किसी संज्ञा शब्द अथवा अव्यय पद की पूर्ण या अपूर्ण पुनरूक्ति हो तो वहां भी अव्ययीभाव समास कहते हैं।
उदाहरण
घर-घर – प्रत्येक घर
पास-पास – पास में
धीरे-धीरे – बहुत धीरे
द्वार – द्वार – प्रत्येक द्वार
गांव- गांव – प्रत्येक गांव
गली-गली – प्रत्येक गली
कानोंकान – कान ही कान
हाथों-हाथ – हाथ ही हाथ में
बीचों बीच – बीच ही बीच में
रातों-रात – रात ही रात

(2) यदि कोई उपसर्ग दूसरे शब्द की विशेषता बता रहा है तो वहां कर्मधारय समास होगा
उदाहरण
सुपुत्र – अच्छा है जो पुत्र
दुर्जन – बुरा है जो जन
कुमार्ग – बुरा है जो चरित्र

(3) जिस पद में पहला पद बे, नि, ना, निर् निस् उपसर्ग से बना हो तो उसके विग्रह में अन्त में प्राय: 'रहित' जोड़ते हैं अथवा प्रारंभ में 'बिना' शब्द लिख दिया जाता है
उदाहरण
निडर – डर से रहित (बिना डर के )
निर्विवाद – विवाद से रहित (बिना विवाद के)
निधड़क – धड़क से रहित ( बिना धड़क के)
निश्चित – चिन्ता से रहित ( बिना चिन्ता के )
बेदाग – बिना दाग के ( दाग से रहित)
बेवफा - बिना वफा के
बेवजह - बिना वजह के
नासमझ – बिना समझ के

(4) अव्यय शब्द 'यथा' से बने शब्दों का विग्रह पद करते समय अन्त में 'के अनुसार' लिखकर अथवा जैसा/जैसी लिखकर करते हैं।
यथागति – गति के अनुसार
यथाशक्ति – शक्ति के अनुसार
यथार्थ – जैसा अर्थ है वैसा
यथायोग्य – जो जितना योग्य

(5) 'प्रति' उपसर्ग से बने शब्दों का विग्रह करते समय शब्द के पहले 'हर' शब्द जोड़ देते हैं।
प्रतिदिन – हर दिन
प्रतिमाह – हर माह
प्रतिवर्ष – हर वर्ष
प्रतिशत – हर शत
प्रत्यंग – हर रंग

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