अव्यय (avyay) अविकारी परिभाषा, भेद और उदाहरण 

अव्यय की परिभाषा वे शब्द जिनके रूप लिंग, वचन, कारक, काल आदि के कारण परिवर्तित नहीं होते, उन्हें अव्यय या अविकारी शब्द कहते हैं। ऐसे शब्द जिनका रूप परिवर्तित नहीं होता है। 
शाब्दिक अर्थ:-  जो व्यय न हो। (परिवर्तित न हो)

अव्यय : परिभाषा, अव्यय के भेद और उदाहरण। Hindi Grammar। Shirswastudy

हिन्दी भाषा में अव्यय 

उदाहरण जब, तब इधर, उधर, अभी, कब, क्यों, वाह, आह, ठीक, तथा, एवं, किन्तु, पर, परन्तु, बल्कि, इत्यादि, अतः, अतएव, अरे, और, चूंकि, अवश्य 
  • आर्यन इधर उधर टहलता है।
  • विवेक अभी आया है।
  • राहुल कब गया था।
  • अव्यय के भेद

अव्यय के भेद

अव्यय मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं।

  1. क्रिया विशेषण अव्यय
  2. संबंध बोधक अव्यय
  3. समुच्चय बोधक अव्यय
  4. विस्मयादि बोधक अव्यय

  1. क्रिया विशेषण अव्यय

वे अव्यय/ अविकारी शब्द जो क्रिया की विशेषता बतलाते हैं। उन्हें क्रिया विशेषण अव्यय कहते हैं।
अर्थात् क्रिया, विशेषण शब्दों की विशेषता बतलाते हैं उन्हें क्रिया विशेषण अव्यय कहते हैं।
जैसे :- धीरे-धीरे , जल्दी-जल्दी, वहाँ, वहाँ, कम, ज्यादा, आज, कल, इत्यादि।
उदाहरण
  • राहुल तेज़ दौड़ता है।
  • आर्यन इधर उधर घुमता है।
  • राहुल कम खाता है।
इन वाक्यों में क्रमशः दौड़ता, घुमता, खाता क्रिया है। क्रमशः तेज़, इधर-उधर, कम शब्द क्रिया कि विशेषता बताता है। अंत कमश: तेज़, इधर-उधर, कम क्रिया विशेषण है।

क्रिया विशेषण अव्यय के प्रकार

क्रिया विशेषण अव्यय चार प्रकार के होते हैं।

  1. काल बोधक क्रिया विशेषण अव्यय
  2. स्थान बोधक क्रिया विशेषण अव्यय
  3. रीति बोधक क्रिया विशेषण अव्यय
  4. परिमाण बोधक क्रिया विशेषण अव्यय

  1. काल बोधक क्रिया विशेषण अव्यय

वे अव्यय शब्द जो क्रिया के होने के समय की विशेषता बतलाता है। उन्हें काल बोधक क्रिया विशेषण अव्यय कहते हैं।
जैसे कब, जब, कल, आज, प्रतिदिन, प्राय: , सायं, अभी, परसों, सुबह, शाम, कभी-कभी, तुरन्त, अब, तब, दिन-रात, पहले, बाद में  इत्यादि।
उदाहरण 
  • मैं प्रतिदिन विद्यालय जाता हूं।
  • रचना अभी आई थी।
  • सुचिता परसों जयपुर जाएगी।
  • वह तुरंत चला गया
  • नितेश परसों मेरे घर आया था।
  • कल बरसात होगी।
  • मैंने शाम को खाना खाया था।
  • मैं दोपहर में विद्यालय से लौटता हूं।
नोट यदि क्रिया के साथ 'कब' शब्द रखकर करें और उत्तर मिले तो वहां काल बोधक क्रिया विशेषण अव्यय होता है।

2. स्थान बोधक क्रिया विशेषण अव्यय

वे अव्यय शब्द जो क्रिया के होने के स्थान की विशेषता बतलाते हैं। उन्हें स्थान बोधक क्रिया विशेषण अव्यय कहते हैं।
जैसे ऊपर, नीचे, पास, दुर, इधर-उधर, आगे, पीछे, दाये, बाये, आमने-सामने, यहां वहां, यहीं, वहीं बाहर भीतर, इत्यादि।
उदाहरण
  • निशा वहां चल रही है।
  • मैं अन्दर पढ़ा रहा था।
  • तुम वहां क्या कर रहे थें।
  • तुम्हें वहां नहीं जाना चाहिए।
  • इस ओर दरवाजा है।
नोट यदि क्रिया के साथ 'कहा' शब्द रखकर प्रश्र किया जाये और उत्तर मिले जाये तो वहां स्थान बोधक क्रिया विशेषण अव्यय होता है।

3. रीति बोधक क्रिया विशेषण अव्यय

वे अव्यय शब्द जो क्रिया के होने के ढंग की विशेषता बतलाते हैं, उन्हें रीति बोधक क्रिया विशेषणअव्यय कहते हैं।
जैसे तेज, झटपट, अचानक, ध्यानपूर्वक, भली-भांति, धीरे-धीरे, मंद-मदं, जल्दी-जल्दी, शीघ्र, यथाशक्ति, बैठे बैठे, फटाफट इत्यादि।
उदाहरण
  • छात्र अध्यापक की बात ध्यानपूर्वक सुन रहे थे।
  • मैंने छात्रों को भली-भांति समझा दिया है।
  • तुम झटपट घर पहुंचो।
  • लड़कियां बहुत जल्दी लिखती हैं।
  • लड़के सुन्दर लिखते हैं।
  • मनोज ध्यान से चलता है।
  • अमित हमेशा सच बोलता है।
  • मेंढ़क धीर-धीरे आगे बढ़ता है।
नोट यदि क्रिया के साथ “कैसा, कैसी, कैसे रखकर प्रश्र करे और उत्तर मिल जाये तो वह रीति बोधक क्रिया विशेषण अव्यय होगा।

रीति बोधक क्रिया विशेषण के प्रकार

रीति बोधक क्रिया विशेषण के छः भेद होते हैं।
कारक बोधक क्रिया विशेषण इसकि पहचान :- इस तरह, उस तरह, उसी प्रकार, इसी प्रकार
स्वीकार बोधक क्रिया विशेषण पहचान :- अवश्य, बहुत अच्छा, हां, ठीक, सच, जी हां।
निषेध वाचक क्रिया विशेषण पहचान :- मत, न, नहीं
प्रश्न वाचक रीति बोधक क्रिया विशेषण पहचान:- कहां, कब, कैसे, कितना, कितनी
निश्चय बोधक क्रिया विशेषण पहचान :- मुख्यत: , वास्तव में, निस्संदेह, वेशक, जरूर, दरसअल
अनिश्चय बोधक क्रिया विशेषण पहचान:- संभवतः, शायद, कदाचित्

प्र विशेषण 

क्रिया विशेषण अथवा शब्दों की विशेषता बतलाने वाले शब्दों को प्र विशेषण कहते हैं।
उदाहरण
  • लड़के बहुत तेज दौड़ने दौड़ते हैं।
  • छात्र अत्यंत सुन्दर लिखते हैं।

4. परिमाण बोधक क्रिया विशेषण अव्यय  

वेअव्यय शब्द जो क्रिया के होने की माप या तौल की विशेषता बतलाते है, उन्हें परिमाण बोधक क्रिया विशेषणअव्यय कहते हैं।
जैसे इतना-उतना, जितना, कम, ज्यादा, खूब, अधिक, बहुत, ढेर सारा, भारी, अत्यंत, थोड़ा, कुछ, लगभग, केवल, काफी, सिर्फ इत्यादि।
उदाहरण
  • कम बोलना सुखी रहना।
  • जितना, चाहे ले लो।
  • मैंने कम खाया था।
  • इतना क्यो घबराते हैं।

2. संबंध बोधक अव्यय

वे अव्यय शब्द जो वाक्य में किसी शब्द से अपना संबंध प्रकट करते हैं, उन्हें संबंध बोधक अव्यय कहते हैं। अर्थात् वे अव्यय शब्द जो किसी संज्ञा, सर्वनाम शब्द के साथ लगकर संबंध वाक्य में प्रयुक्त अन्य शब्द से बताते हैं, उन्हें संबंध बोधकअव्यय कहते हैं।
संबंध बोधक अव्यय के प्रकार
संबंध बोधक अव्यय को दस प्रकार के होते हैं।
  1. काल वाचक के पहले, पीछे, उपरांत, आगे
  2. स्थान वाचक सामने, भीतर, निकट, यहां
  3. दिशावाचक आसपास, ओर, तरफ, पार
  4. समतावाचक भांति, समान, तुल्य योग
  5. साधन वाचक  द्वारा, सहारे माध्यम
  6. विषय वाचक विषय, भरोसे, बाबत,नाम
  7. विरूद्ध वाचक विपरीत, विरूद्ध, खिलाफ, उलटे
  8. संग वाचक संग, सहचर, साथ
  9. हेतु वाचक  सिवा, लिए, वास्ते, कारण
  10.  तुलावाचक। अपेक्षा, सामने, आगे 

3. समुच्चय बोधक अव्यय

वे अव्यय शब्द जो दो शब्दों या दो वाक्यों को जोड़ने या अलग करने का कार्य करते हैं। उन्हें समुच्चय बोधकअव्यय कहते हैं।
  • राजेश ने कठिन मेहनत की ओर सफल हुआ
  • निशा बहुत तेज दौड़ी लेकिन प्रथम नहीं आ सकी
  • विकास और मोहन बहुत अच्छे मित्र हैं।

समुच्चय बोधक अव्यय के भेद

समुच्चय बोधक अव्यय के दो प्रकार के होते हैं।

  1. समानाधिकरण समुच्चय बोधक
  2. व्यधिकरण समुच्चय बोधक अव्यय

  1. समानाधिकरण समुच्चय बोधक अव्यय

जो समुच्चय बोधक समान स्थिति वाले अर्थातु स्वतंत्र शब्दों, वाक्यांशों। या वाक्यों को जोड़ने का कार्य करते हैं।, उन्हें समानाधिकरण समुच्चय बोधकअव्यय कहते हैं।
पहचान :- और, तथा, व, चाहे, किंतु, परन्तु, लेकिन, मगर, या, इसलिए आदि
उदाहरण
  • रानी और सोनल खेल रही है।
  • चाहे पायल गाए चाहे पारूल है।
समानाधिकरण समुच्चय बोधक चार प्रकार होते हैं।

  1. संयोजक
  2. विकल्प सूचक या विभाजक
  3. विरोध सूचक
  4. परिणाम सूचक
1. संयोजक दो पदों, वाक्यांशो या वाक्यों को जोड़ने वाले अव्यय अर्थात् दो स्थितियों को जोड़ने का कार्य करने वाले अवयव को संयोजक समानाधिकरण समुच्चयअवयव कहते हैं।
हैं
पहचान :- और, तथा, व, एवं आदि
उदाहरण
  • राम, लक्ष्मण और सीता वन को गए।
  • मीरा ने गीत गाया और राधा ने नृत्य किया।
2. विकल्प सूचक या विभाजक दो पदों वाक्यांशों अथवा वाक्यों के भेद प्रकट करते हुए जिनमें एक के ग्रहण और दूसरे के त्याग का बोध हो
पहचान :- या, अथवा, चाहे, आदि
उदाहरण
  • विज्ञान अथवा कला में से एक चुन लो।
  • चाहे यह करो चाहे वह
  • आप मेरे साथ रहेंगे या बलराम के साथ।
  • ठीक से पढ़ाओं अथवा नौकरी छोड़ दो।
  • तू पढ ले या बात कर ले
  • आप पहुंच जायेंगे या में आपको फोन करूं।
3. विरोध सूचक दो विरोधी उपवाक्य को जोड़ने वाले समुच्चय बोधक अव्यय अर्थात् जब दो उप वाक्यों में के बीच विरोधाभास का बोध हो उसे विरोध सूचकअव्यय कहते हैं
पहचान :- पर, परन्तु, मगर, किंतु, लेकिन, बल्कि, वरन्, प्रत्युत, अपितु आदि
उदाहरण
  • सूरदास अंधे थे परन्तु संवेदनहीन नहीं
  • अपराधी को मात्र सज़ा ही नहीं वरन् मृत्युदंड मिलना चाहिए था।
  • केशव पढ़ने में तो अच्छा है लेकिन बात बहुत करता है
4. परिमाण सूचक जिस समुच्चय बोधक के बाद का वाक्यांश या वाक्य पहले अंश परिणाम हो अर्थात जब पहले उपवाक्य से कार्य का तथा दूसरे उपवाक्य से उसके परिणाम का बोध होम उसे परिणाम सूत्र कहते हैं।
पहचान :- अतः, अतएव, इस कारण, इस वास्ते, नहीं तो, अन्यथा आदि
उदाहरण
  • उसने चोरी की थी इसलिए उसे सजा मिली।
  • राहुल बहुत बीमार था अतः चुप ही बैठा रहा
  • आज बाजार बंद है इसलिए कुछ नहीं मिलेगा।

2. व्यधिकरण समुच्चय बोधक

जिन वाक्यों में एक मुख्य उपवाक्य हो तथा दूसरा उपवाक्य उस पर आश्रित हो तो ऐसे उपवाक्य को जोड़ने वाले अव्यय व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहलाते हैं।
पहचान :- कि, क्योंकि, यदि, यद्यपि, मानों, तथापि, अर्थात्, यानि, चूंकि, यहां तक कि आदि।
  • जल्दी तैयार हो जाओ ताकि गाड़ी पकड़ सके।

व्यधिकरण समुच्चय बोधक के प्रकार

व्यधिकरण समुच्चय बोधक के चार प्रकार होते हैं।

  1. कारण बोधक
  2. संकेत बोधक
  3. उद्देश्य बोधक
  4. स्वरूपबोधक अव्यय

1. कारण बोधक मुख्य उपवाक्य की बात का कारण बताने वाले अवयव कारण बोधक वेदी करण समुच्चयबोधक कहलाते हैं
पहचान :- कि, चूंकि, क्योंकि
उदाहरण
  • वह इसलिए विद्यालय नहीं आया क्योंकि बीमार था।
2.  संकेत बोधक मुख्य उपवाक्य से आश्रित उपवाक्य में कही गई बात की ओर संकेत करने वाले अथवा शर्त प्रकट करने वाले एवं संकेत बोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधकअव्यय कहते हैं।
पहचान :- यदि, तो, यद्यपि, तथापि
उदाहरण
  • यदि तुम परिश्रम करोगे तो अवश्य सफल हो जाओगे
  • यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती
3. उद्देश्य  बोधक अव्यय मुख्य उपवाक्य का उद्देश्य आश्रित उपवाक्य में प्रकट करने वाले अवयव उद्देश्य बोधक व्यधिकरण समुच्चय बोधकअव्यय कहते हैं
पहचान :- ताकि, जिससे कि, कि, जो
उदाहरण
  • यह इसलिए नित्य सैर को जाता है ताकि स्वस्थ रहें
  • वह लड़का जो प्रथम आया है मेरा भाई है।
4. स्वरूप बोधक अव्यय जो अवयव मुख्य उपवाक्य में कहीं गई कहीं गई बात का आश्रित उपवाक्य में स्पष्टीकरण करते हैं उन्हें स्वरूप बोधकअव्यय कहते हैं।
पहचान :- मानो, यानि, अर्थात्
उदाहरण
  • इतनी तेज आंधी चली मानव तूफान आ गया।
  • पेटु राहुल इतना खाता है मानो भीम है

4. विस्मयादि बोधक अव्यय

वे अव्यय शब्द जो हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य, उत्साह, चेतावनी, प्रशंसा, प्रसन्नता, भय आदि मनो भाव को प्रकट करते हैं। उन्हें विस्मयादि बोधकअव्यय कहते हैं।

विस्मयादि बोधक अव्यय के भेद

आश्चर्य बोधक क्या, अरे, अहो, है, सच, ओह, ओहो, ऐ।
शोक बोधक।  उप, हाय,  आह, हेराम, राम-राम
हर्ष बोधक वाह, धन्य, कहा
प्रशंसा शाबाश, वाह अति सुन्दर
क्रोध बोधक अरे, चुप
भय बोधक हाय, बाप ये
चेतावनी बोधक  खबरदार, बचो, सावधान
घृणा बोधक थू-थू,  उप, धिक्कार, छि: छि:, धत्
इच्छा बोधक खास, हाय
सम्बोधन बोधक अजी, से, अरे, सुनते हों
अनुमोदन बोधक :-  अच्छा, हां हां, ठीक
 आशीर्वाद बोधक :- शाबाश,   जीते रहो, खुश रहो
उदाहरण
  • छि: छि: ये घृणित कार्य है।
  • अहा! इतना मधुर गीत।


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