बहुव्रीहि समास प्रकार : (BAHUVRIHI SAMAS) परिभाषा, उदाहरण

बहुव्रीहि समास (Multivalent compound)

बहुव्रीहि समास वह समास होता है जिसमें दोनों पद में कोई पद प्रधान नहीं होता है। तथा दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।


बहुव्रीहि समास : ( BAHUVRIHI SAMAS) परिभाषा_ प्रकार_उदाहरण

पहचान:-  बहुव्रीहि समास की

  1. बहुव्रीहि समास में दोनों पद अप्रधान होते हैं।
  2. इसमें दोनों पद किसी संज्ञा के विशेषण होते हैं।
  3. बहुव्रीहि समास में अन्य पद के अर्थ की प्रधानता होती हैं।
  4. इसमें दोनों पद मिलकर तीसरा अर्थ प्रकट करते हैं।
  5. इसके विग्रह के अंत में जो, जिसे, जिसको, जिससे जिस-पर, जिसका, जिसकी, जिसके आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है।


बहुव्रीहि समास के प्रकार

बहुव्रीहि समास के मुख्य रूप से तीन भेद है।

  1. समानाधिकरण
  2. व्यधिकरण
  3. सहार्थक
1. समानाधिकरण बहुव्रीहि समास
जहां दोनों पदों का स्वरूप समान हो अर्थात् दोनों पदों की विभक्ति समान हो, उसे समानाधिकरण बहुव्रीहि समास कहते हैं।

उदाहरण
प्राप्तोदक – प्राप्त कर लिया है उदक (जल) जिसने
लब्धप्रतिष्ठित – पा ली है प्रतिष्ठा जिसने
कलहप्रिय – कलह है प्रिय जिसको
कृतकार्य – कर लिया है कार्य जिसने
दत्तचित – दे दिया है चित जिसने

2. व्यधिकरण बहुव्रीहि समास
जिस समस्त पद में दोनों पदों का अधिकरण समान न हो अर्थात् दोनों पदों में अलग-अलग कारक चिह्नो का प्रयोग हो, उसे व्यधिकरण बहुव्रीहि समास कहते हैं।

उदाहरण
कुसुमाकर – वह जिसके कुसुम के शर है – कामदेव
मकरध्वज – वह जिसके मकर का ध्वज है- कामदेव
ब्रजवल्लभ – वह जो ब्रज का वल्लभ है – कृष्ण
हिमतनया – वह जो हिम की तनया है – पार्वती
शैलनंदिनी – वह जो शैल की नंदिनी है – पार्वती
वाचस्पति – वह जो वाक् का पति है – बृहस्पति
सूर्यपुत्र – वह जो सूर्य का पुत्र है – कर्ण
मक्खीचूस – मक्खी को भी चूस जाता है जो – कंजूस
नकटा – कट गई है नाक जिसकी
दीर्घबाहु – लम्बी है भुजाएं जिसकी- विष्णु
कुसुमायुध – कुसुम का आयुध जिसका – कामदेव
मोदकप्रिय – लड्डू है प्रिय जिसको – गणेश
शाखामृग – शाखा का है मृग जो – बंदर
पन्नगारि – सर्पों का है शत्रु जो – गरूड़
कामारि – कामदेव का है शत्रु जो – शिव
सहस्त्राक्ष – हजार है नेत्र जिसके – इन्द्र
रावनारि – रावण का है शत्रु जो – राम

3. सहार्थक बहुव्रीहि समास
साथ अर्थ के योग में बहुव्रीहि समास होता है
उदाहरण
सानुज – अनुज के साथ है जो
सबान्धन - भाई- बंधुओं के साथ है जो
सानन्द – आनन्द के साथ है जो
सपत्नीक – पत्नी के साथ है जो
सचेत – होश के साथ है जो
सबल – शक्ति के साथ है जो
संदेह – देह के साथ है जो
सह-परिवार – परिवार के साथ है जो
सप्रेम – प्रेम के साथ है जो
सफल – फल के साथ है जो
सविनय – विनय के साथ है जो
सकुशल – कुशलता के साथ है जो

महत्वपूर्ण उदाहरण

गजानन – वह जिसका आनन गज जैसा है -गणेश
चतुरान – वह जिसके चतुर् (चार) आनन है ब्रह्मा
पंचानन – वह जिसके पांच आनन है शिव
पडानन- वह जिसके षट् आनन है कार्तिकेय
सुग्रीव – वह जिसकी ग्रीवा सुन्दर है वानरराज
चक्षुश्रवा – वह जो चक्षु से श्रवण करता है सांप
दशानन – वह जिसके दस आनन है रावण
षण्मुख – वह जिसके षट् मुख है कार्तिकेय
देशमुख – वह जिसके दस मुख है रावण
पीताम्बर – वह जिसके पीत अम्बर ( वस्त्र) है ( कृष्ण/ विष्णु)
मनोज – वह जो मन से जन्म लेता है कामदेव


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बहुव्रीहि समास प्रकार : (BAHUVRIHI SAMAS) परिभाषा, उदाहरण बहुव्रीहि समास प्रकार : (BAHUVRIHI SAMAS) परिभाषा, उदाहरण Reviewed by Rajesh shirswa on February 21, 2020 Rating: 5

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